अध्‍यक्ष का संदेश
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मैं सितंबर 2017 से भापाबो के साथ जुड़ा और तबसे भापाबो ने ड्यूटेरियम के गैर-नाभिकीय अनुप्रयोगों के क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में अपना कार्य विस्‍तार किया है । भापाबो ने परमाणु ऊर्जा विभाग के उद्देश्‍यों के समर्थन में इसकी कई गतिविधियों में समाज एवं राष्‍ट्र की सेवा के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को तैनात करने का कार्य किया है । मुझे आपको यह जानकारी देते हुए खुशी है कि भापाबो ने ड्यूटेरियम यौगिकों एवं सक्रिय फार्मास्‍युटिकल इंटरमिडियटों के विकास हेतु देश की फार्मास्‍यूटिकल कंपनियों जैससे मेसर्स क्लियरसिंथ, मुंबई तथा मेसर्स एसवाईएनएमआर केमिकल, बेंगलुरू के साथ भारी पानी की आपूर्ति एवं हमारे बैद्धिक संसाधनों को साझा करते हुए करारों पर हस्‍ताक्षर किए है । बोर्ड ने डीएई-आईसीटी केंद्र के अधीन आईपीटी, मुंबई तथा बीएआरसी और एम.एस. विश्‍वविद्यालय, बड़ौदा जैसे अन्‍य प्रमुख शैक्षणिक संस्‍थानों के सहयोग से नई जनरेशन के ड्यूटेरित फार्मास्‍युटिकलों तथा थेराप्‍यूटिक उपयोग हेतु प्राकृतिक उत्‍पाद जैसे उत्‍पादों के विकास के लिए पहल की है । डयूटेरियम लेबलवाले यौगिकों की बढ़ती मांगों की कल्‍पना करते हुए भापाबो मौजुदा उत्‍पादों के साथ-साथ वैश्विक मांगों के कुछ और उत्‍पादों के उत्‍पादन के लिए भापासं, बड़ौदा में उत्‍पादन सुविधाओं को बढ़ा रहा है ।

मुझे यह बात आपको बताते हुए खुशी है कि भारी पानी बोर्ड की कुछ महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान अद्भुत प्रगति की है जिससे हेवी वाटर टीम की महानता परिलक्षित होती है । ऑक्‍सीजन-18 संवर्धन, ड्यूटेरियम अवक्षयित पानी की छिपी क्षमता को उजागर करना, हीलियम की स्‍वदेशी रूप से रिकवरी, नाभिकीय ग्रेड के सोडियम का उत्‍पादन, संवर्धित बोरॉन, दुर्लभ सामग्री का निष्‍कर्षण इत्‍यादि इसके गर्व करने लायक उदाहरण हैं ।

चरण 1 के परिणामों से उत्‍साहित होकर भापाबो ने कैंसर के उपचार में ड्यूटेरियम अवक्षयित पानी (डीडीडब्‍ल्‍यू) की चिकित्‍सीय क्षमता का उपयोग करने के अपने प्रयासों को जारी रखा है । बोर्ड ने कैंसर के उपचार, अनुसंधान एवं शिक्षण हेतु प्रगत केंद्र (एक्‍ट्रेक), मुंबई तथा सेलुलर एवं आण्विक जीव विज्ञान हेतु केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद के साथ दुसरे चरण के सहयोगात्‍मक अनुसंधान की शुरुआत की है । इस दिलचस्‍प क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए भापाबो अन्‍य एजेंसियों के साथ सहयोग की भी योजना बना रहा है ।

मुझे आप सभी को यह बात बताने में बहुत खुशी हो रही है कि मणुगुरू में ऑक्‍सीजन-18 जल उत्‍पादन संयंत्र ने 70 परमाणु प्रतिशत का संवर्धन हासिल किया है और इसके मेडिकल ग्रेड उत्‍पाद की शुरूआत वर्ष 2018 के दौरान ही हो जाना अपेक्षित है ।

जैसा कि आप सभी जानते है ऊर्जा संरक्षण भापाबो की गतिविधियों का अभिन्‍न हिस्‍सा है । 31 मार्च, 2018 को भापासं, कोटा में 2 मेगावाट टर्बाइन जनरेटर का कमीशनींग कर उसे विद्युत उत्‍पादन हेतु ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइल करके और इसे अधिक मजबूती प्रदान की गई है । विनिमय इकाई के बहिस्‍त्राव के निम्‍न ग्रेड ऊष्‍मा का उपयोग करके अतिरिक्‍त प्रशीतन के उत्‍पादन के लिए मणुगूरू में स्थित वाष्‍प अवशोषन प्रशीतन मशीन का कमीशनींग किया गया है ।

मुझे आपको यह बताते हुए खुशी है कि हमारा एचआरडी विभाग बहु-कार्य और कौशल-विकास हेतु आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने में बहुत ही सक्रिय है । भापासं, मणुगुरू और बड़ौदा में कमीशन किए गए ऑपरेटर ट्रेनिंग सिमुलेटर (ओटीएस) H2S-H2O तथा NH3-H2 आधारित संयंत्रों में प्रचालन गतिविधियों के प्रशिक्षण की व्‍यवस्‍था से युक्‍त हैं ।

मुझे यह कहते हुए गर्व है बोरान संवर्ध्‍दन संयंत्रों के लिए नई सुविधाओं में वृद्धि की गई है । तालचेर में स्‍थापित बीएफ 3 गैस उत्‍पादन संयंत्र का 15 मई, 2018 को भारत के माननीय राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा बीएआरसी में रिमोट के जरिये उद्घाटन कर उसे राष्‍ट्र को समर्पित किया गया । आईजीसीएआर तथा भाविनि की की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए मणुगुरू में बोरान कार्बाइड संश्‍लेषण और पेलिटाइजेशन सुविधा में वृद्धि की जा रही है ।

किसी भी संगठन का वित्‍तीय निष्‍पादन उसके प्रयासों का सही प्रतिबिंब होता है । संयंत्र परियोजनाओं के लिए आबंटित बजट राशि का उपयोग किया गया तथा हमने रू. 37.14 करोड का वास्‍तविक व्‍यय किया है । यह भारी पानी बोर्ड तथा भारी पानी संयंत्रों के हमारे समर्पित सहकर्मियों की कड़ी मेहनत और उनके सहयोग के कारण ही संभव हो सका है ।

भापाबो ने वर्ष 2017-18 की अवधि के दौरान भारी पानी, बोरान कार्बाइड पावडर, आर्गेनो-फास्‍फोरस विलायकों तथा डी-लेबलित यौगिकों का लक्षित उत्‍पादन हासिल किया है, तथा 2018-19 का वार्षिक लक्ष्‍य भी पूरा होने की अपेक्षा है ।

यह उल्‍लेख करते हुए मुझे गर्व है कि भारी पानी संयंत्र (तूतीकोरिन) के पुन: स्‍टार्ट अप, तूती‍कोरिन में विलायक उत्‍पादन एवं विलायक निष्‍कर्षण सुविधा की स्‍थापना, बड़ौदा में सोडियम उत्‍पादन एवं शुद्धिकरण सुविधा की स्‍थापना सहित हमारी विभिन्‍न परियोजना गतिविधियॉं प्रगति पथ पर हैं ।

स्‍वदेशी स्‍त्रोतों से हीलियम का उत्‍पादन तथा इंडियन रॉक फास्‍फेट से यूरेनियम की रिकवरी भापाबो के नए क्षेत्र हैं तथा इनमें अच्‍छी प्रगति हो रही है । पऊवि की लीडरशिप में हाल ही में परिवर्तन हुआ है तथा श्री के. एन. व्‍यास ने डॉ. शेखर बसु से सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार तथा परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्‍यक्ष के रूप में कार्यभार ले लिया है । डॉ. बसु के सक्षम नेतृत्‍व में पऊवि द्वारा दिए गए सहयोग एवं समन्‍वय के लिए भापाबो उनकी सराहना करता है तथा भापाबो उनके स्‍वस्‍थ, समृद्ध एवं भावी सक्रिय जीवन की कामना करता है । श्री व्‍यास को नए चुनौतिपूर्ण कार्यभार का सम्‍मान मिलने पर बधाई देते हुए भापाबो को गर्व महसूस करता है । मुझे विश्‍वास है कि इनके कुशल नेतृत्‍व में पऊवि नई ऊँचाइयों प्राप्‍त करेगा । मैं, पऊवि के अधिदेश को प्राप्‍त करने में भापाबो की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्‍वासन देता हूँ ।

भापाबो की उत्‍कृष्‍टता को पऊवि तथा अन्‍य राष्‍ट्रीय निकाय द्वारा मान्‍यता प्रदान की गई है । हाल ही में, श्री वी. के. खिलनानी, निदेशक (प्रचालन) को होमी भाभा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अवार्ड तथा आईएनएई फेलोशिप प्रदान की गई है । इसके साथ ही पऊवि युवा वैज्ञानिक अवार्ड श्री धीरज सखरोडि़या, वैज्ञा.अधि./एफ तथा पऊवि ग्रुप एचीवमेंट अवार्ड श्री आर षणमुगम, महाप्रबंधक (यांत्रिकी), तथा श्री के. वी. ताले, भापासं, (कोटा) तथा उनकी टीम को प्रदान किया गया है ।

भापाबो गत पांच दशकों की उपलब्धियों की विरासत को आगे ले जा रहा है । इसमें, भारी पानी की कमी से प्रचुरता, ड्रॉप से ड्रम तक उत्‍पादन, दूरदर्शिता के साथ विविधीकरण गतिविधियों में कार्य शामिल हैं । भापाबो परिवार में कार्यग्रहण करने के पश्‍चात मुझे भारी पानी दिवस-2018 के अवसर पर आयोजित समारोह में बोर्ड के पूर्व मुख्‍य कार्यकारियों, निदेशकों, अन्‍य वरिष्‍ठ पदाधिकारियों तथा भापाबो के वर्तमान पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ अत्‍यंत सुनहरे तथा यादगार पल बिताने का मौका मिला । इस अवसर पर हमारे पथप्रदर्शक श्री सुरेन्‍द्र शर्मा तथा श्री एस. एम सुंदरम को कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि के रूप में हमारे बीच पाकर हम धन्‍य हुए । यह मेरे लिए एक बहुत ही रोमांचकारी अवसर है मुझे हमारे चुनौतीपूर्ण अतीत की विरासत को, शानदार वर्तमान तथा उज्‍ज्‍वल भविष्‍य को समझने का सौभाग्‍य मिला ।

1 मई 1969 में भारी पानी परियोजना बोर्ड का सृजन हुआ है, अत: कारण यह संगठन अगले अपनी वर्ष स्‍वर्ण जयंती मनाएगा । इस गर्व के क्षण के समय मुझे श्री राबर्ट फास्‍ट की प्रसिद्ध कविता याद रही है ।

The woods are lovely, dark and deep,
But I have promises to keep,
And miles to go before I sleep,
And miles to go before I sleep.

डॉ. यू. कामाची मुदली
अध्‍यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी, भापाबो

Last updated on: 22-Apr-2019