:: Heavy Water Board - A unit under Department of Atomic Energy, Govt. of India.

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

भारी पानी क्या हैं?

भारी पानी (D2O) हाइड्रोजन के एक समस्‍थानिक (आइसोटोप) ड्यूटीरियम तथा ऑक्‍सीजन का एक यौगिक है । ड्यूटीरियम को भारी हाइड्रोजन के नाम से भी जाना जाता है । भारी पानी को ड्यूटीरियम ऑक्साईड के नाम से भी जाना जाता है। नाभिक में अतिरिक्‍त न्‍यूट्रान की उपस्थिति के कारण ड्यूटीरियम का परमाण्विक द्रव्‍यमान 2 होता है जबकि हाइड्रोजन का द्रव्‍यमान 1 होता है । ड्यूटीरियम, हाइड्रोजन तथा हाइड्रोजन युक्‍त यौगिकों जैसे जल, हाइड्रोकार्बन आदि में विद्यमान रहता है, तथा प्रकृति में काफी कम मात्रा में 140 पीपीएम से 160 पीपीएम स्‍तर तक पाया जाता है । अत: यह आवश्‍यक है कि निम्‍न सांद्रण स्‍तरवाले निवेश्‍य भंडार (फीड स्‍टॉक) को बड़ी मात्रा में संसाधित किया जाए ताकि 99.8 की समृद्धि स्‍तर तक के रिएक्‍टर ग्रेड के अंतिम उत्‍पाद का उत्‍पादन किया जा सके । भारी पानी तथा सामान्‍य पानी के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों में काफी समानता है । लेकिन भारी पानी के नाभिकीय गुणधर्मों में काफी भिन्‍नता है जो इसे नाभिकीय रिएक्‍टर में एक मंदक के रूप में उपयोग हेतु एक अत्‍यंत ही उपयुक्‍त पदार्थ बनाता है ।

 

मंदक (मोडरेटर) क्‍या है?

तापीय रिएक्‍टरों में मंदक की आवश्‍यकता विखंडन अभिक्रिया में न्‍यूट्रानों के उत्‍पादन की गति को धीमा कर 0.25 ev  तक लाने में होती है ताकि श्रृंखला अभिक्रिया को अनवरत बनाये रखा जा सके । सामान्‍य रुप से उपयोग में लाये जाने वाले मंदकों भारी पानी, ग्रेफाइट, बेरीलियम तथा हल्‍का जल शामिल हैं । भारी पानी एक उत्‍कृष्‍ट मंदक है । एक अच्‍छे मंदक में न्‍यूट्रानों को धीमा करने की शक्ति तथा निम्‍न न्‍यूटॉन अवशोषण अनुप्रस्‍थकाट का होना आवश्‍यक है ।

 

शीतलक क्‍या है?

विखंडन रिएक्‍टर में उत्‍पन्‍न ताप ऊर्जा को शीतलक द्वारा दूर किया जाता है । पानी एक उत्‍कृष्‍ट शीतलक है जो फीड से ताप को हटा सकता है । भारी पानी का उपयोग एक प्राथमिक शीतलक के रुप में होता है जिससे विखंडन अभिक्रिया में उत्‍पन्‍न ताप को द्वितीयक शीतलक हल्‍के जल में स्‍थानांतरित किया जाता है । गैस शीतित रिएक्‍टरों में CO2 गैस का उपयोग एक शीतलक के रुप में किया जाता है । शीतलक, ताप को द्वितीयक शीतलक अर्थात सामान्‍य जल में स्‍थानांतरित करता है, जिसके एक उपयुक्‍त दाब पर वाष्‍प बनती है और इसी वाष्‍प से टरबाईन चलाई जाती है । टरबाइन से जनरेटर चला कर बिजली पैदा की जाती है ।
 

क्‍या भारी पानी रेडियोसक्रिय होता है?

नहीं । यह रेडियोसक्रिय नहीं होता है । यह ड्यूटीरियम, जो कि हाइड्रोजन का एक स्थिर आइसोटोप है, का ऑक्‍साइड है ।

 

यह कब और क्‍यों कहा जाता है कि नाभिकीय विद्युत केन्‍द्रों में प्रयुक्‍त होने वाले भारी पानी में रेडियों सक्रियता होती है?

इसका कारण यह है कि भारी पानी कुछ ड्यूटीरियम नाभि‍कीय रिएक्‍टर में एक न्‍यूट्रॉन अवशोषित कर ट्रीशियम में रुपान्‍तरित हो जाता हैं । ट्रीशियम रेडियोसक्रिय होता है । साथ ही, मंदक या शीतलक के रुप में भारी पानी के साथ संवहित कुछ आयोनिक अशुद्धताएं किरणन के दौरान सक्रिय हो जाती हैं । इस प्रकार नाभिकीय रिएक्‍टरों में प्रयुक्‍त भारी पानी में रेडियासक्रियता आ जाती है ।
 

क्‍या भारी पानी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अहितकर है?

नहीं, यह स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अहितकर नहीं है । वस्‍तुत: मानव शरीर में प्राकृतिक रुप से ही कुछ ग्राम भारी पानी मौजूद रहता है । नवजात शिशुओं, नई माताओं और वयस्‍कों पर क्‍लीनिकल अध्‍ययनों में भारी पानी का उपयोग किया गया है किंतु इसमें कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया है । भारी पानी का विषाक्‍त प्रभाव तभी पड़ सकता है जब मानव शरीर में भारी पानी की मात्रा शरीर के कुल तरल पदार्थों के 20% से अधिक हो जाए, जो कि सामान्‍यत: संभव नहीं है । कोई भी बुरा प्रभाव तभी पड़ सकता है जब बहुत बड़ी मात्रा में भारी पानी पी लिया जाए ।

 

निम्‍न कोटिकृत भारी पानी (Degraded Heavy Water) क्‍या है?

जिस  भारी  पानी में हल्‍के जल की मात्रा अधिक होती है, उसे निम्‍न कोटिकृत भारी पानी कहते हैं ।
 

भारी पानी निम्‍न कोटिकृत क्‍यों हो जाता है?

भारी जल और हल्‍के जल में काफी सजातीयता होती है । भारी पानी वायु में विद्यमान जल (नमी) को आसानी से अवशोषित कर सकता है । यह किसी अन्‍य प्रक्रिया से हल्‍के जल से मिलने पर भी निम्‍न कोटिकृत हो सकता है ।
 

क्‍या भारी पानी का कोई सुनिश्चित जीवन काल है?

यदि भारी पानी को शुष्‍क अक्रिय गैसों (N2, He आदि) से आच्‍छादित किया जाता है, भारी पानी का कोई सुनिश्चित जीवनकाल नहीं होता ।

 
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7 April,2015