कार्य एवं कर्तव्‍य एवं प्रक्रिया

भारी पानी संयंत्र (मणुगूरु) भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का समर्थन करने वाली सबसे बड़ी भारी पानी उत्पादन सुविधा है । यह एक ISO-9001 (2015) और ISO-14001 (2015) प्रमाणित संगठन है और भारी पानी बोर्ड का प्रमुख है । भारत में इस प्रकार की प्रक्रिया के आधार पर यह संयंत्र दूसरा है। इस प्रकार का पहला संयंत्र कोटा, राजस्थान में स्थित है जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और भारी पानी बोर्ड के प्रयासों से पूरी तरह स्वदेशी प्रौद्योगिकी से विकसित है । मणुगुरू संयंत्र में दो स्ट्रीम एक्सचेंज यूनिट्स होती हैं, जो बायो-थर्मल हाइड्रोजन सल्फाइड - पानी (H2S-H2O) समस्थानिक विनिमय प्रक्रिया के बाद वैक्यूम आसवन पर आधारित होती हैं जिसकी कुल स्थापित क्षमता 185 मेट्रिक टन/वर्ष के न्यूक्लियर ग्रेड भारी पानी (D2O) है । बिजली और स्टीम की आवश्यकताएं अपने स्वयं के कोयला आधारित कैप्टिव पावर प्लांट द्वारा पूरी की जाती हैं । कैप्टिव पॉवर प्लांट में तीन पल्सवराइज्ड कोयला फायर्ड बॉयलर और तीन संघनक टर्बाइन होते है जो प्रत्येक 30 मेगावाट बिजली और 30 एटीए और 8 एटीए दबाव पर आवश्यक मात्रा में प्रक्रिया भाप उत्पन्न करने में सक्षम है।

भारी पानी संयंत्र (मणुगूरु) तेलंगाण राज्य के भद्राद्रि-कोत्तगूडेम जिला में भद्राद्री के पास मिट्टगूडेम गांव और मणुगूरु से 12 KM दूर, गोदावरी नदी के तट पर स्थित है । मणुगूरु स्थल को सिंगरेणी कोयला क्षेत्रों और गोदावरी नदी के निकटता के कारण चुना गया था जो क्रमशः बड़ी मात्रा में कोयला और संयंत्र के लिए आवश्यक पानी प्रदान करते हैं ।

गोदावरी नदी का पानी लिया जाता है और एक्सचेंज यूनिट्स को फीड करने से पहले आवश्यक शुद्धि की जाती है, जहां D2O सामग्री 150 ppm से 15% तक H2S-H2O द्वि-थर्मल समस्थानिक विनिमय प्रक्रिया से तीन चरण कैसकोड में समृद्ध किया जाता है और 99.8% का D2O का उत्पादन करने के लिए वैक्यूम आसवन द्वारा समृद्ध किया जाता है ।

भा.पा.सं. मणुगूरु सुरक्षित और कुशल संचालन के लिए प्रतिबद्ध है और वाणिज्यिक ग्रेड भारी पानी निर्यात करता है ।

परियोजना की जीरो तारीख 01.09.1982 थी । सी.पी.पी. एवं मैन प्लेंट के लिए सलाहकार क्रमशः मेसर्स टी.पी.एल. और मेसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड थे। एक्सचेंज यूनिट के स्ट्रीम -2 को दिसंबर, 1990 और स्ट्रीम -1 को नवंबर 1, 1991 को कमीशनन किया गया था । संयंत्र कमीशन होने के बाद तीन वर्षों की छोटी अवधि में अपनी रेटेड क्षमता के करीब पहुंच गया ।

भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए भारी पानी के उत्पादन के प्राथमिक अधिदेश को पूरा करने के बाद, भापासंम ने INPP के लिए बोरॉन -10 आइसोटोप उत्पादन सुविधा का संवर्धन, सौर ऊर्जा को उपयोग में लाना और O-18 के उत्पादन में विविधता लाने की गतिविधियां शुरू कीं ।

Last updated on: 05-Apr-2019