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अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी, भापाबो का संबोधन

 

आज भारी पानी बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी के रूप में आपको संबोधित करते हुए और हमारे महान राष्ट्र में भारी पानी उत्पादन के भविष्य के लिए हमारे सामूहिक दृष्टिकोण को साझा करते हुए मुझे बहुत सम्मानित महसूस हो रहा है । मैं, इस प्रतिष्ठित संगठन का नेतृत्व करने और हमारे समर्पित लोगों की टीम के साथ काम करने हेतु दिये गये अवसर के लिए बहुत आभारी हूं ।

मैं इस अवसर पर भारी पानी बोर्ड के अग्रदूतों और पूर्ववर्ती दूरदर्शी नेतृत्व को सलाम करता हूं जिन्होंने भारी पानी कार्यक्रम में योगदान दिया है और इसे एक बहुत ही सफल संगठन बनाया है, जो न केवल भारी पानी की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है बल्कि वैश्विक मांगों को भी पूरा कर रहा है और इस तरह  डॉ. होमी जहांगीर भाभा का सपना पूरा हो रहा है । उनके समर्पण, कड़ी मेहनत और नवोन्मेषी भावना ने भारी पानी उत्पादन और इसके विभिन्न गैर- नाभिकीय अनुप्रयोगों में भारत की विशेषज्ञता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इससे हमें एक स्थायी विरासत मिली है जिससे भारी पानी बोर्ड को लाभ होता रहा है ।

सन् 1956 में पहला भारी पानी संयंत्र चालू करने के बाद से भारी पानी बोर्ड ने एक लंबा सफर तय किया है और आज यह दुनिया में भारी पानी का अग्रणी उत्पादक है । मैंने अपनी यात्रा भारी पानी संयंत्र, मणुगुरू में इसके कमीशनिंग चरण के दौरान शुरू की, जब भारत में भारी पानी की सख्त जरूरत थी । यह ‘किसी भी कीमत पर भारी पानी’ की स्थिति से ‘न्यूनतम लागत पर भारी पानी’ की स्थिति तक की एक सुंदर और आत्म-संतुष्टिदायक यात्रा थी । मैंने अपने वरिष्ठों के साथ-साथ अपने अधीनस्थों से बहुत कुछ सीखा और टीम वर्क ने मणुगुरु को भारी पानी बोर्ड का फ्लैगशिप बना दिया । कोटा संयंत्र के प्रचालन के प्रारंभिक चरण के दौरान सीखे गए अनुभवों के आधार पर मणुगुरु संयंत्र को इसके डिजाइन चरण के दौरान ही बहुत सारी कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिली, जिससे ड्यूटेरियम रिकवरी, उत्पादकता और स्ट्रीम फैक्टर में सुधार हुआ । वर्षों के प्रचालन अनुभव के साथ, सभी भारी पानी संयंत्रों में संसाधनों और ऊर्जा के संरक्षण के लिए बहुत सारे उपांतरण किए गए हैं । आंतरिक ऊर्जा ऑडिट किए गए और कई ENCON योजनाएं लागू की गईं जिससे भारी पानी उत्पादन में विशिष्ट ऊर्जा की खपत में अभूतपूर्व कमी आई है । यह सब 'टीम भापाबो' के अथक प्रयासों के कारण हुआ है । भापासं, थल में मेरे दो साल के कार्यकाल ने मुझे भारी पानी उत्पादन के लिए अमोनिया-हाइड्रोजन आधारित तकनीक के बारे में काफी कुछ सीखने में मदद की है । हमारे लिए तात्कालिक चुनौती, भारी पानी संयंत्र, तूतीकोरिन को फिर से शुरू करना है । जैसा कि आप जानते हैं, दुनिया भर में भारी पानी की मांग बढ़ रही है और तूतीकोरिन को फिर से शुरू करना हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा । मुझे यकीन है कि अपने सर्वोत्तम प्रयासों से हम विभाग द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर इकाई को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे ।

परमाणु ऊर्जा विभाग ने भारी पानी बोर्ड के अधिदेश को भारी पानी उत्पादन के साथ-साथ विशेष पदार्थों के उत्पादन तक विस्तृत कर दिया है । हमारे विशाल औद्योगिक अनुभव, परियोजना प्रबंधन में समृद्ध अनुभव और नवीन दृष्टिकोण से नाभिकीय ईंधन चक्र के अग्रांत व पश्चांत दोनों के लिए नाभिकीय विलायकों, बोरान कार्बाइड पेलेटों और फास्ट रिएक्टर कार्यक्रम के लिए सोडियम धातु के बड़े पैमाने पर उत्पादन में लाभ मिला है । हाल ही में, तूतीकोरिन में सॉल्वैंट्स प्रोडक्शन प्लांट (एसपीपी) चालू किया गया है, जिससे देश औद्योगिक ग्रेड सॉल्वैंट्स में आत्मनिर्भर हो गया है ।

जैसा कि आप जानते हैं, यह भारी पानी बोर्ड के लिए गर्व का क्षण है कि मणुगुरु के पायलट स्केल प्लांट से H2O18 उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरा है और अब, यह सही समय है कि हमें औद्योगिक पैमाने पर प्लांट स्थापित करने के लिए तैयार होना चाहिए ताकि, H2O18  के मामले में देश "आत्मनिर्भर" बन सके ।

भारी पानी बोर्ड ने कई नई विकासात्मक गतिविधियाँ भी शुरू की हैं जैसे कि स्क्रैप से कोबाल्ट, निकेल और मोलिब्डेनम का निष्कर्षण, बेयर लिकर से गैलियम की पुनर्प्राप्ति और उर्वरक इकाई पर्ज गैस स्ट्रीम से हीलियम की पुनर्प्राप्ति आदि । ये गतिविधियाँ निष्पादन के विभिन्न स्तरों पर हैं और हमें यकीन है कि हमारे सक्षम मानव संसाधन द्वारा ये गतिविधियां भी समय सीमा के भीतर पूरी की जाएंगी ।

‘संरक्षा पहले' शुरू से ही हमारा आदर्श वाक्य रहा है । उत्कृष्ट संरक्षा आँकड़े अन्य समान आकार के खतरनाक रासायनिक प्रक्रिया उद्योगों (सीपीआई) की तुलना में हमारे भारी पानी संयंत्रों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं । भारी पानी संयंत्रों में, हम एईआरबी के सख्त नियमों, उन्नत अभियांत्रिकी, अच्छी तरह से परिभाषित मानक प्रचालन प्रक्रिया, व्यापक प्रशिक्षण, आपातकालीन तैयारी और संरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के संयोजन के माध्यम से संरक्षा को प्राथमिकता देते हैं । हालाँकि,  हमारे पुराने होते संयंत्रों का अवशिष्ट जीवन मूल्यांकन और जीर्णन प्रबंधन महत्त्वपूर्ण विषय हैं और उन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । वर्तमान और बाद के वर्षों में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्ति के कारण कुशल मानव संसाधनों का विकास करना हमारा अगला फोकस क्षेत्र है ।  

भारी पानी, जो कि  दूरगामी अनुप्रयोगों वाला एक महत्वपूर्ण संसाधन है,  के उत्पादन के माध्यम से भारी पानी बोर्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । उत्कृष्टता, नवाचार और संरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता ने हमें परमाणु ऊर्जा, चिकित्सा अनुसंधान और औद्योगिक प्रक्रियाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाया है ।

जैसे-जैसे हम आगे आने वाली चुनौतियों और अवसरों का सामना कर रहे हैं, मैं उन सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण की पुष्टि करना चाहूंगा जिन्होंने हमारी पूरी यात्रा में हमारा मार्गदर्शन किया है । इन सिद्धांतों में गुणवत्ता और संरक्षा के उच्चतम मानक, हमारे प्रचालन की दक्षता और स्थिरता को बढ़ाना शामिल है ।

आइए हम दृढ़ संकल्प, समर्पण, नवीनता और उद्देश्य की साझा भावना के साथ आगे बढ़ें । साथ मिलकर, हम न केवल आज की चुनौतियों का सामना करेंगे बल्कि एक उज्जवल और अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा में रास्ता भी बनाएंगे । मुझे यकीन है कि आपके प्रतिबद्ध सहयोग से, भापाबो निकट भविष्य में नई ऊंचाइयों को अवश्य छुएगा ।

 

एस. सत्यकुमार

अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी

भारी पानी बोर्ड

Last updated on: 14-Sep-2023